Tuesday, September 30, 2014

Jab mein chota tha ...

जब मैं छोटा था,
शायद दुनिया
बहुत बड़ी हुआ करती थी..

मुझे याद है
मेरे घर से "स्कूल" तक का
वो रास्ता,

क्या क्या
नहीं था वहां,
चाट के ठेले,
जलेबी की दुकान,
बर्फ के गोले
सब कुछ,

अब वहां
"मोबाइल शॉप",
"विडियो पार्लर" हैं,

फिर भी
सब सूना है..

शायद
अब दुनिया
सिमट रही है...
.
.
.

जब
मैं छोटा था,
शायद
शामें बहुत लम्बी
हुआ करती थीं...

मैं हाथ में
पतंग की डोर पकड़े,
घंटों उड़ा करता था,

वो लम्बी
"साइकिल रेस",
वो बचपन के खेल,

वो
हर शाम
थक के चूर हो जाना,

अब
शाम नहीं होती,

दिन ढलता है
और
सीधे रात हो जाती है.

शायद
वक्त सिमट रहा है..

जब
मैं छोटा था,
शायद दोस्ती
बहुत गहरी
हुआ करती थी,

दिन भर
वो हुजूम बनाकर
खेलना,

वो
दोस्तों के
घर का खाना,

वो
लड़कियों की
बातें,

वो
साथ रोना...

अब भी
मेरे कई दोस्त हैं,
पर दोस्ती
जाने कहाँ है,

जब भी
"traffic signal"
पर मिलते हैं
"Hi" हो जाती है,

और
अपने अपने
रास्ते चल देते हैं,

होली,
दीवाली,
जन्मदिन,
नए साल पर
बस SMS आ जाते हैं,

शायद
अब रिश्ते
बदल रहें हैं..
.ं
जब
मैं छोटा था,
तब खेल भी
अजीब हुआ करते थे,

छुपन छुपाई,
लंगडी टांग,
पोषम पा,
टिप्पी टीपी टाप.
अब
internet, office,
से फुर्सत ही नहीं मिलती..

शायद
ज़िन्दगी
बदल रही है.
.
.
जिंदगी का
सबसे बड़ा सच
यही है..
जो अकसर क़ब्रिस्तान के बाहर
बोर्ड पर
लिखा होता है...

"मंजिल तो
यही थी,
बस
जिंदगी गुज़र गयी मेरी
यहाँ आते आते"
.
ज़िंदगी का लम्हा
बहुत छोटा सा है...

कल की
कोई बुनियाद नहीं है
और आने वाला कल
सिर्फ सपने में ही है..

अब
बच गए
इस पल में..

तमन्नाओं से भर
इस जिंदगी में
हम सिर्फ भाग रहे हैं.

कुछ रफ़्तार
धीमी करो,
मेरे दोस्त,

और
इस ज़िंदगी को जियो..
खूब जियो मेरे दोस्त..... ।।

Tuesday, September 23, 2014

Bacche bade ho gaiye hain ...

एक युवक क़रीब 20 साल के बाद विदेश से अपने शहर लौटा था !

बाज़ार में घुमते हुए सहसा उसकी नज़रें सब्जी का ठेला लगाये एक बूढे पर जा टिकीं ! बहुत कोशिश के बावजूद भी युवक उसको पहचान नहीं पा रहा था ! लेकिन न जाने बार बार ऐसा क्यों लग रहा था की वो उसे बड़ी अच्छी तरह से जनता है !

उत्सुकता उस बूढ़े से भी छुपी न रही, उसके चेहरे पर आई अचानक मुस्कान से मैं समझ गया था कि उसने युवक को पहचान लिया था ! काफी देर ...की जेहनी कशमकश के बाद जब युवक ने उसे पहचाना तो उसके पाँव के नीचे से मानो ज़मीन खिसक गई !

जब युवक विदेश गया था तो उनकी एक बड़ी आटा मिल हुआ करती थी, घर में नौकर चाकर कIम किया करते थे ! धर्म कर्म, दान पुण्य में सब से अग्रणी इस दानवीर पुरुष को युवक ताऊजी कह कर बुलाया करता था !

वही आटा मिल का मालिक और आज सब्जी का ठेला लगाने पर मजबूर .. ?

युवक से रहा नहीं गया और वो उसके पास जा पहुँचा और बहुत मुश्किल से रुंधे गले से पूछा : "ताऊ जी, ये सब कैसे हो गया ...?"

भरी ऑंखें से बूढ़े ने युवक के कंधे पर हाथ रख उत्तर दिया : - "बच्चे बड़े हो गए हैं बेटा" !!

Sunday, September 07, 2014

Population calculation ...

एक गाँव में बाढ आई थी तो मीडिया वाले ग्राम सरपंच के पास गए और बोले:- आपके गांव की आबादी सरकारी रजिस्टर में पांच सौ है और नदी से अब तक नौ सौ लोग निकाले जा चुके हैं, ऐसा कैसे?

सरपंच: रजिस्टर का हिसाब सही है! क्या है कि हमारे गांव में किसी ने हेलीकाप्टर नहीं देखा है, वो आर्मी वाले इनको निकाल के किनारे करते है और ये हेलीकाप्टर पे चढ़ने के लिए फिर से पानी में कूद जाते हैं!! भगवान झूठ न बुलाये, मैं खुद ही नौ-दस बार पानी मे कूद चूका हूँ ...

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