Sunday, December 30, 2007

Dard

Dil me kuch bacha nai dard k siwa,
akho me ata nai koi ansu k siwa,

dost tu mat sath chodna mera,

zindagi me kuch bacha nai teri dosti k siva ....

Tuesday, December 11, 2007

तितलीया

रेशम सी किरने,एक नया सवेरा
फूलों में बदली सारी कलिया

कही दव की बूँदे ,थोड़ी पत्तियों की शरारत
सारी अवनी पर,एक नयी हरकत

खुशबू की कशीश्, महकता समा
अपना अपना फूल चुनने आई तितलिया

कानो में करती मधुर वाणी
कोमल सी तितली बनती बड़ी सयानी

नाज़ुक से होठों से चुनती पराग कन
फूल भी पिघल कर देता अपना धन

करते है दोनो प्रेम की बाते
कुछ पल बाद रुखसत हो जाते

पर एक प्यारे वादे के साथ,के
के रोज़ रोज़ होंगी ये मीठि मुलाकाते.

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