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Wednesday, September 28, 2016

Inspirational story of a true Banker

एक बैंक  अधिकारी के द्वारा  लोन  रिकवरी के दौरान उनके मनो स्थिति का चित्रण
वास्तविक घटना

घर में दो ही लोग सबसे परेशान रहते हैं...एक वो जो घर में सबसे बड़ा हो, और दूसरा वो जो सबसे छोटा हो...सबसे बड़ा सबसे बड़ी जिम्मेदारियों को ढ़ोता है, कंधे भले झुक जाएं उम्मीदों के बोझ से..हौसले न गिरे किसी के, बस इस ख्याल के साथ आगे बढ़ता रहता है...ये अलग बात है कि सभी ये कहने से नहीं चूकते कि अपने तो कोई काम करते नहीं बस हुकूम चलाते रहते हैं..
और जो सबसे छोटा उसके तो कहने ही क्या...ऊपर से नीचे आते सारे हुक्म उसी पर रुकते हैं क्योंकि उससे नीचे तो कोई है ही नहीं...यानी सबसे ऐश बीच वाले की ही होती है...ऊपर से कोई बात आई तो नीचे पहुँचा दो और नीचे से कोई माँग आई तो ऊपर पहुँचा दो...
ये इतनी बकैती में इसलिए कर रहा हूँ कि पिछले साढ़े चार साल से बैंक की अलग अलग शाखाओं पर सहायक प्रबन्धक बना हुआ था...न सबसे ऊपर था और न सबसे नीचे..हाँ, लेकिन कभी काम को ऊपर नीचे टरकाने वाला काम नहीं किया...इसके गवाह मेरे साथ काम किए सभी साथी, उच्चाधिकारी और सभी क्षेत्रों की जनता रही है..जहाँ से भी ट्रांसफर हुआ है मेरा, मेरी कमी को लोगों ने महसूस किया है...
इधर पिछले चार दिनों से मैं शाखा प्रबन्धक बना हुआ हूँ...घर में इज्जत बढ़ गई है..पहले टिफिन में सादी रोटी मिलती थी, अब पराठे मिल रहे हैं...पहले बैंक से लौटने पर गुड़ के साथ पानी पीने को मिलता था..अब तो बेकरी के बिस्किट और आलू के चिप्स के साथ अदरक वाली चाय भी मिल रही है....मैनेजरी का इतना फ़ायदा तो मिल ही रहा है..अलग बात है कि अब अंदरखाने से उठने वाली माँगो का स्तर भी इसी हिसाब से बढ़ने वाला है...

बैंक की नौकरी सेवा की नौकरी है...जनता की सेवा करते हुए मुझे अपने बैंक के लिए मुनाफ़ा कमाना है..लेकिन, इधर कुछ सालों से नीतियों में कोई खामी हो, आंकलन में हुई त्रुटि या फ़िर कोई दुर्योग..बैंक के दिए हुए कर्जों की वसूली बड़ी कम आ रही...फ़िर भी मैं तो बैंक का मैनेजर हूँ..मेरे लिए अपने बैंक का पैसा वसूलना ही मेरा काम है..चाहें मेरे सामने भी कोई किसान उतनी ही मुश्किलें क्यों न पैदा करदे जितनी एक खरबपति ने पूरी सरकार के सामने पैदा करदी है...मैं जनता हूँ कि वो बड़े स्तर का ऋणी दिनभर में जितने की शराब पी जाता होगा उससे भी कम कर्ज इन किसानों पर बाक़ी है...लेकिन मुझे वसूली करनी है क्योंकि मैं सरकारी नौकर हूँ और भावनाओं से नौकरी नहीं होती....

कल बैंक पहुंचते ही मैंने शाखा के सन्देशवाहक यादव जी से दस बड़े बकाएदारों की सूची माँगी कि जरा क्षेत्र में चलकर इनका हालचाल लिया जाए....मैं अपनी गाड़ी दौड़ाते हुए गांवों में निकला... सारे गाँव पता नहीं क्यों एक जैसे ही होते हैं..पतली सी पक्की सड़क के किनारे एक बड़े से पीपल का पेड़ और पेड़ के चारो और बना हुआ चबूतरा, चबूतरे के उस पार किसी सती माई का मन्दिर, और मन्दिर के सामने बैठकर कीर्तन गाते कुछ लोग..रास्ते से गुजरते लोगों को दौड़ दौड़ कर प्रसाद देते बच्चे...प्रसाद लेने के बाद राहगीरों का मन्दिर के दानपात्र में कुछ सिक्के डाल देना..मैंने भी प्रसाद लेकर चन्द सिक्के डाले थे उस पात्र में उस ईश्वर का नाम लेकर जो मुस्कुरा रहा होगा कहीं मेरी मूर्खता पर...पर क्या करें गांव के लोगों के लिए वो पीपल ही शिरडी है और वो चबूतरा ही कैलाश है..और उस मन्दिर की सती माई ही वैष्णो माता है...

बकाएदारों से पैसों का तगादा करना बड़ा ही अलोकप्रिय कार्य है..लेकिन ईश्वर की कृपा से मुझे लोगों की सराहना ही मिल रही थी..इसीबीच मैं एक ऐसे बकाएदार के घर पहुँचा जो यादव जी की गलती से उस सूची में आ गया था..असल में यादव जी ने पच्चीस हजार को ढ़ाई लाख पढ़ लिआ और मैं पहुँचा पूछते पूछते उस घर जहाँ मुझे पहुंचना था...गांव के लोगों ने बताया कि ये व्यक्ति मर चुका है..मैंने सोंचा कि कोई बात नहीं लड़कों से बात करेंगे...
घर के दरवाजे पर कोई नहीं था सिवाय तीन चार बच्चों के जिन्हें देखकर ये मैं समझ नहीं पाया कि ये जो कुछ खाते हैं इनकी देह में लगता भी है या इनका भोजन इन्हें ही खा रहा है...बच्चे कुछ खेल रहे थे, न जाने क्या..लेकिन खेल रहे थे.....
मैंने धीरे से दरवाजे पर लगी साँकल बजाई.... कोई नहीं आया..फिर मैंने आवाज लगाई..अब भी कोई नहीं आया...मैं चलने को हुआ तबतक एक आहट हुई...एक महिला बाहर आई..मैंने बकाएदार के बारे में पूछा..उत्तर मिला वो उस महिला के श्वसुर थे जो तीन साल पहले ही किसी बीमारी से मर गए...मैंने कहा कि अपने पति को बुलाओ..पता चला कि उस औरत का पति अभी कुछ महीने पहले मर गया...लोगों ने कहा कि हार्ट अटैक आया था...मेरा मन अजीब होने लगा..मैं अब तुरन्त वहाँ से लौटना चाहता था..तबतक एक दूसरी औरत सिर पर पल्लू रखे हुए बाहर आई पानी से भरे गिलास लेकर और पास पड़ी खाट को बिछाकर बैठने का इशारा किया..न चाहते हुए भी मुझे बैठना पड़ा.... तबतक यादव जी ने उन औरतों से कहना शुरू किया "बैंक का पैसा चुपचाप जमा कर दो, नहीं तो नए नए साहब आए हैं, कार्यवाई कर देंगे तो दिक्कत हो जाएगी...कर्जा ब्याज लगके चालीस हजार हो गया है..कुछ ब्याज में छूट मिल जाएगा अगर जल्दी जमा करदो तो..नही तो अब आर सी कटने ही वाली है.."

मैंने यादव जी को हाथ के इशारे से चुप रहने का इशारा किया..मेरे दिमाग में उस घर में हुई दो मौतों का सन्नाटा गूँज रहा था..मैंने चलने का उपक्रम किया..पहले आई महिला मेरे सामने हाथ जोड़कर आई और बोली "साहब ये मेरी देवरानी है और ये बच्चे हमारे ही हैं..बाप और भाई की मौत से ऐसा सदमा लगा मेरे देवर को वो तबसे आजतक खाट से ही नहीं उठा..हवा मार दिया है पूरे शरीर में...हिलता डुलता भी नहीं..इसी के इलाज में ससुर की जमीन भी बिक गई..लेकिन ठीक नही हुआ..मन में तो था कि एक आदमी भी रहेगा घर में तो घर बिना माथ के नही रहेगा..लेकिन, अब कौन सा आदमी और कहाँ का माथ...हम दो औरतें अब बस इसी अपराधबोध में जी रहे हैं कि आखिर ये बच्चे क्यों पैदा कर दिए.. आखिर इनका क्या दोष है जो इनका बाप नहीं रहा.."

कहते कहते वो औरत रोने लगी..काले चश्मे के शीशों के पीछे मेरी भावनाएँ भी छुप ही गईं..
मैं गाड़ी में बैठ गया..तबतक वही औरत फ़िर दौड़ती हुई आई और बोली कि साहब जेल मत भिजवाईएगा...
मैं सोंचता रहा मन में कि काश तुम मेरी माँ होती..तुम्हारे ये आँसू चीर चुके होतें अबतक मेरे सीने को..और फ़िर चाहें मुझे अपना खून ही क्यों न बेचना पड़ जाए...कागज के कुछ बंडल जिनके न होने से जलील हो रही हैं तुम्हारी आँखें और भूखे बिलख रहे हैं तुम्हारे बच्चे..उन बंडलों को फेंक मारता इस काले चश्मे वाले मैनेजर के मूँह पर और पोंछ देता तुम्हारे गालों पर बह चले तुम्हारे ये सारे दुःख...लेकिन, क्या करूँ, तुम मेरी माँ नहीं और मैं तुम्हारा कुछ भी नहीं...मैं तो बस एक बैंक मैनेजर हूँ...

कल का खिन्न हुआ मन आज भी ठीक नहीं था..आज बैंक भी मैं थोड़ी देर से पहुँचा.. बिना किसी से कुछ बात किए सीधे अपने चेम्बर में चला गया..स्टाफ़ को लगा होगा कि कहीं किसी बात पर नाराज़ तो नहीं..एक एक करके सबलोग नमस्ते करने आने लगे..मैंने सबको अपना अपना काम करने को कहा....

तबतक मेरी टेबल पर चाय आ चुकी थी..अभी मैंने कप में उंगली फ़ंसाई ही थी कि वो कल वाली औरत खड़ी दिखी, जैसे अंदर आना चाह रही हो..मैंने एक कर्मचारी को भेजकर उसे बुलाया...लग रहा था जैसे बहुत दिनों बाद घर से बाहर निकली हो...शायद अपने घर की सबसे अच्छी साड़ी पहनी थी..सकुचाते हुए मेरी मेज पर कुछ हरे हरे नोट रखे उसने..मैंने गिने तो चार हजार थे....हाथ जोड़कर बोली कि इतने का ही इंतजाम हो पाया है..आप कोई करवाई मत करिएगा..मैं जल्दी ही सब जमा कर दूंगी....
मन में आया कि वो पैसे उसे वापस करदूँ.. और कह दूँ कि खरबों लेकर भागे पर तो कोई कार्यवाई हो ही नहीं पा रही तो तुमपर क्या होगी...लेकिन मेरे भीतर का मैनेजर मेरे भावुक व्यक्तित्व पर हावी था...मैंने तुरन्त कैशियर को बुलाया और वो पैसे जमा करवाकर रशीद उस महिला को देकर जल्दी ही बाक़ी भी जमा करने की हिदायत दी....औरत जाने को हुई..जाने कौन सी भावना का ज्वार था मेरे भीतर या उसकी गरीबी पर इतना विश्वास था जो बारबार यही कहता था कि चार हजार रुपए भी ये कहाँ से ला सकती है...मैंने पूछ लिया कि ये पैसों का इंतजाम कैसे हुआ...जवाब पहले उसकी आँखों ने दिया..फिर उसके होठ बोल उठे..."चाय की दुकान पर बेटे को लगाया है साहब..वहीं से उधार मांग कर लाइ हूँ..उसकी तनखाह से कटेगा.."

धप्प से बैठ गया मैं अपनी कुर्सी में..आँखों के सामने नवल घूमने लगे..दूध का गिलास लेकर इनके पीछे पीछे कौन नहीं दौड़ता...एक कौर खाने के लिए कितनी सिफारिश करातें हैं...और यहाँ एक छः साल के बच्चे को ये क्या करना पड़ गया अचानक...मैंने तुरन्त अपना पर्स देखा..हजार के पाँच नोट पड़े थे...लेकिन डर भी लगा..कहीं किसी स्वाभिमानी का स्वाभिमान न आहत हो जाए...

मैंने कहा "तुम्हारे कर्ज़े में पाँच हजार की छूट आई है..और वो छूट मैंने अपने पास ही रखी है..ये लो पैसे और जल्दी से जाओ अपने बेटे को उस चाय की दुकान से छुड़ाकर ले आओ.." कहते कहते गला भरभरा आया मेरा..वो औरत भी रो पड़ी..मेरे पास आई मेरे सिर पर हाथ रखकर बोली "आपके बाल बच्चे बने रहेंगे साहब..." मैंने आसुंओं को पलकों पर रोकने का जतन करते हुए पैसे उसके हाथ में रखे और उसे जाने का इशारा किया...

वो जा चुकी थी..मेरा मन भी बहुत हल्का हो गया था...मैंने घँटी बजाकर यादव जी को बुलाया..चाय ठंडी हो गई थी..दूसरी मँगानी थी....

Sunday, April 10, 2016

kya khoob likha hai kisine

kya khoob likha hai kisine

प्यास लगी थी गजब की...
मगर पानी मे जहर था...

पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते.


बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!

वक़्त ने कहा.....काश थोड़ा और सब्र होता!!!
सब्र ने कहा....काश थोड़ा और वक़्त होता!!!

सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब...।।
आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।।


"हुनर" सड़कों पर तमाशा करता है और "किस्मत" महलों में राज करती है!!

"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,

पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,
वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता"..
अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!!
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया....
अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा.

लौट आता हूँ वापस घर की तरफ... हर रोज़ थका-हारा,
आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ।

“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे...!!”

भरी जेब ने ' दुनिया ' की पहेचान करवाई और खाली जेब ने ' अपनो ' की.

जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया,
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। ...!!!

हंसने की इच्छा ना हो...
तो भी हसना पड़ता है...
.
कोई जब पूछे कैसे हो...??
तो मजे में हूँ कहना पड़ता है...
.

ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों....
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.

"माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती...
यहाँ आदमी आदमी से जलता है...!!"

दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट,
ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं,
पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा
कि जीवन में मंगल है या नहीं।

Tuesday, September 22, 2015

Story - Think before you follow

एक चीता सिगरेट का
कश लगाने ही वाला था.!
.
कि अचानक चूहा वहाँ
आया और बोला,"भाई छोड़
दो नशा, आओ मेरे साथ,
देखो जंगल कितना
खूबसूरत है।
.
"चीता चूहे के साथ चल दिया।
आगे हाथी कोकीन ले रहा था,
.
चूहा फिर बोला, "भाई छोड़ दो
नशा, आओ मेरे साथ,देखो
जंगल कितना खूबसूरत है।
"हाथी भी साथ चल दिया।
.
आगे शेर व्हिस्की पीने की
तैयारी कर रहा था,
चूहे ने उसे भी वही कहा।
.
.
शेर ने ग्लास साइड पर रखा
और चूहे को 5-6 थप्पड़ मारे।
.
.
हाथी बोला: अरे क्यों मार रहे हो इस बेचारे को?

शेर बोला, "ये साला रोज़ भांग पीके ऐसे ही सबको पूरी रात जंगल घुमाता है।"

Wednesday, September 09, 2015

Short story - Bull & Farmer

ये कहानी आपके जीने की सोच बदल देगी

एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया. वह बैल घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं।

अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चूका था अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ।

किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी।

जैसे ही बैल कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा और फिर ,अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया।

सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया....
अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था।

जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे -वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एक सीढी ऊपर चढ़ आता जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह बैल कुएँ के किनारे पर पहुंच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया।

ध्यान रखें - आपके जीवन में भी बहुत तरह से मिट्टी फेंकी जायेगी बहुत तरह की गंदगी आप पर गिरेगी जैसे कि ,आपको आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही आपकी आलोचना करेगा कोई आपकी सफलता से ईर्ष्या के कारण आपको बेकार में ही भला बुरा कहेगा, कोई आपसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो आपके आदर्शों के विरुद्ध होंगे...

ऐसे में आपको हतोत्साहित हो कर कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हर तरह की गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख ले कर उसे सीढ़ी बनाकर बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है।

सकारात्मक रहें
सकारात्मक जिएं

Tuesday, September 08, 2015

Short story - how to live life

धीरूभाई अम्बानी किसी अर्जेंट मिटिगं करने जा रहे थे।

राह में एक भयंकर तूफ़ान आया , ड्राइवर ने अम्बानी से पूछा -- अब हम क्या करें?

अम्बानी ने  जवाब दिया -- कार चलाते रहो.

तूफ़ान में कार चलाना बहुत ही मुश्किल हो रहा था, तूफ़ान और भयंकर होता जा रहा था. अब मैं क्या करू ? -- ड्राइवर ने पुनः पूछा.

कार चलाते रहो. -- अम्बानी ने पुनः कहा.

थोड़ा आगे जाने पर ड्राइवर ने देखा की राह में कई वाहन तूफ़ान की वजह से रुके हुए थे......

उसने फिर अम्बानी से कहा -- मुझे कार रोक देनी चाहिए.......मैं मुश्किल से देख पा रहा हुं!!.......

यह भयंकर है और प्रत्येक ने अपना वाहन रोक दिया है.......

इस बार अम्बानी ने फिर निर्देशित किया -- कार रोकना नहीं. बस चलाते रहो....

तूफ़ान ने बहुत ही भयंकर रूप धारण कर लिया था किन्तु ड्राइवर  ने कार चलाना नहीं छोड़ा..........

और अचानक ही उसने देखा कि कुछ साफ़ दिखने लगा है.........

कुछ किलो मीटर आगे जाने के पश्चात ड्राइवर ने देखा कि तूफ़ान थम गया और सूरज निकल आया......

अब अम्बानी  ने कहा -- अब तुम कार रोक सकते हो और बाहर आ सकते हो........

चालक  ने पूछा -- पर अब क्यों?

अम्बानी ने कहा -- जब तुम बाहर आओगे तो देखोगे कि जो राह में रुक गए थे, वे अभी भी तूफ़ान में फंसे हुए हैं.....

चूँकि तुमने कार चलाने का प्रयत्न नहीं छोड़ा, तुम तूफ़ान के बाहर हो......

यह किस्सा उन लोगों के लिए एक प्रमाण है जो कठिन समय से गुजर रहे हैं.........

मजबूत से मजबूत इंसान भी प्रयास छोड़ देते हैं........किन्तु प्रयास कभी भी छोड़ना नहीं चाहिए.......

निश्चित ही जिन्दगी के कठिन समय गुजर जायेंगे और सुबह के सूरज की भांति चमक आपके जीवन में पुनः आयेगी.......!!

ऐसा नहीं है की जिंदगी बहुत छोटी है। दरअसल हम जीना ही बहुत देर से शुरू करते हैं!!!
👤

Friday, August 28, 2015

Bhai - Bahan Ka pyar

एक छोटी सी लड़की अपने भाई से पूछती हैं -  भैया प्यार क्या होता हैं..??
.
.
भाई का प्यारा सा जवाब -
तुम रोज़ मेरे पॉकेट से
चॉकलेट चुरा के
खा जाती हो..!!

मैं जानता हूँ
फिर
भी अगले दिन चॉकलेट वहीं रखता हूँ
यही तो प्यार हैं..!!


Wednesday, July 15, 2015

Our judicial System

हमारी न्याय व्यवस्था 

एक जंगल में गाय भागती हुई जा रही थी।

हाथी ने उसे रोक के उससे भागने का कारण पुछा।


गाय ने कहा, "सरकार ने जंगल के सारे बैलों को पकड़ने का आदेश दिया है।"

हाथी ने कहा, "पर तुम क्यों भाग रही हो, तुम तो गाय हो।"

गाय ने कहा, "मैं गाय तो हूँ, लेकिन अगर मुझे पकड़ लिया, तो २० साल मुझे ये साबित करने में लग जाएंगे, कि मैं बैल नहीं, गाय हूँ।"

हाथी भी गाय के साथ भागने लगा!

Monday, December 15, 2014

Ye mera INDIA

परी हो तुम गुजरात की, रूप तेरा मद्रासी !
सुन्दरता कश्मिर की तुममे ,सिक्किम जैसा शर्माती !!
:
खान-पान पंजाबी जैसा, बंगाली जैसी बोली !
केरल जैसा आंख तुम्हारा ,है दिल तो तुम्हारा दिल्ली !!
:
महाराष्ट्र तुम्हारा फ़ैशन है, तो गोवा नया जमाना !
खुशबू हो तुम कर्नाटक कि,बल तो तेरा हरियाना !!
:
सिधी-सादी ऊड़ीसा जैसी,एम.पी जैसा मुस्काना !
दुल्हन तुम राजस्थानी जैसी ,त्रिपुरा जैसा इठलाना !!
:
झारखन्ड तुम्हारा आभूषण,तो मेघालय तुम्हारी बिन्दीया है !
सीना तो तुम्हारा यू.पी है तो ,हिमांचल तुम्हारी निन्दिया है !!
:
कानों का कुन्डल छत्तीसगढ़ ,तो मिज़ोरम तुम्हारा पायल है !
बिहार गले का हार तुम्हारा ,तो आसाम तुम्हारा आंचल है !!
:
नागालैन्ड- आन्ध्र दो हाथ तुम्हारे, तो ज़ुल्फ़ तुम्हारा अरुणांचल है !
नाम तुम्हारा भारत माता, तो पवित्रता तुम्हारा ऊत्तरांचल है !!
:
सागर है परिधान तुम्हारा,तिल जैसे है दमन- द्वीव !
मोहित हो जाता है सारा जग,रहती हो तुम कितनी सजीव !!
:
अन्डमान और निकोबार द्वीप,पुष्पों का गुच्छ तेरे बालों में !
झिल-मिल,झिल-मिल से लक्षद्वीप, जो चमक रहे तेरे गालों में !!
:
ताज तुम्हारा हिमालय है ,तो गंगा पखारती चरण तेरे !
कोटि-कोटि हम भारत वासियों का ,स्वीकारो तुम नमन मेरे !!

Monday, October 06, 2014

Pyar vo hai ....

प्यार वो हैं..

जब हम tution से वापस आये और पापा कहे-
"बेटा लेट होने वाले थे तो कॉल कर देते"

प्यार वो है....
जब भाभी कहती हैं -
"ओये हीरो लड़की पटी की नही"

प्यार वो हैं....
जब बहन कहती हैं-
"देखूंगी मेरी शादी के बाद तेरा काम कौन करेगा

प्यार वो हैं....
जब हम निराश हो और भाई आकर कहे-
"चल नौटंकी कही घुमने चलते हैं"

प्यार वो है...
जब दोस्त कॉल करके कहे-
ओये कमीने जिन्दा हैं या मर गया"
यह है सच्चा प्यार ||

इसे अपने जीवन मैं बिलकुल भी ना गवाएं..
प्यार केवल गर्ल फ्रेंड या बॉय फ्रेंड
होना ही नही हैं।
यह प्यार उससे भी ऊपर हैं |

ज्यादा से ज्यादा शेयर करके
अपने दोस्तों को भी अपने प्यार

Tuesday, September 30, 2014

Jab mein chota tha ...

जब मैं छोटा था,
शायद दुनिया
बहुत बड़ी हुआ करती थी..

मुझे याद है
मेरे घर से "स्कूल" तक का
वो रास्ता,

क्या क्या
नहीं था वहां,
चाट के ठेले,
जलेबी की दुकान,
बर्फ के गोले
सब कुछ,

अब वहां
"मोबाइल शॉप",
"विडियो पार्लर" हैं,

फिर भी
सब सूना है..

शायद
अब दुनिया
सिमट रही है...
.
.
.

जब
मैं छोटा था,
शायद
शामें बहुत लम्बी
हुआ करती थीं...

मैं हाथ में
पतंग की डोर पकड़े,
घंटों उड़ा करता था,

वो लम्बी
"साइकिल रेस",
वो बचपन के खेल,

वो
हर शाम
थक के चूर हो जाना,

अब
शाम नहीं होती,

दिन ढलता है
और
सीधे रात हो जाती है.

शायद
वक्त सिमट रहा है..

जब
मैं छोटा था,
शायद दोस्ती
बहुत गहरी
हुआ करती थी,

दिन भर
वो हुजूम बनाकर
खेलना,

वो
दोस्तों के
घर का खाना,

वो
लड़कियों की
बातें,

वो
साथ रोना...

अब भी
मेरे कई दोस्त हैं,
पर दोस्ती
जाने कहाँ है,

जब भी
"traffic signal"
पर मिलते हैं
"Hi" हो जाती है,

और
अपने अपने
रास्ते चल देते हैं,

होली,
दीवाली,
जन्मदिन,
नए साल पर
बस SMS आ जाते हैं,

शायद
अब रिश्ते
बदल रहें हैं..
.ं
जब
मैं छोटा था,
तब खेल भी
अजीब हुआ करते थे,

छुपन छुपाई,
लंगडी टांग,
पोषम पा,
टिप्पी टीपी टाप.
अब
internet, office,
से फुर्सत ही नहीं मिलती..

शायद
ज़िन्दगी
बदल रही है.
.
.
जिंदगी का
सबसे बड़ा सच
यही है..
जो अकसर क़ब्रिस्तान के बाहर
बोर्ड पर
लिखा होता है...

"मंजिल तो
यही थी,
बस
जिंदगी गुज़र गयी मेरी
यहाँ आते आते"
.
ज़िंदगी का लम्हा
बहुत छोटा सा है...

कल की
कोई बुनियाद नहीं है
और आने वाला कल
सिर्फ सपने में ही है..

अब
बच गए
इस पल में..

तमन्नाओं से भर
इस जिंदगी में
हम सिर्फ भाग रहे हैं.

कुछ रफ़्तार
धीमी करो,
मेरे दोस्त,

और
इस ज़िंदगी को जियो..
खूब जियो मेरे दोस्त..... ।।

Tuesday, September 23, 2014

Bacche bade ho gaiye hain ...

एक युवक क़रीब 20 साल के बाद विदेश से अपने शहर लौटा था !

बाज़ार में घुमते हुए सहसा उसकी नज़रें सब्जी का ठेला लगाये एक बूढे पर जा टिकीं ! बहुत कोशिश के बावजूद भी युवक उसको पहचान नहीं पा रहा था ! लेकिन न जाने बार बार ऐसा क्यों लग रहा था की वो उसे बड़ी अच्छी तरह से जनता है !

उत्सुकता उस बूढ़े से भी छुपी न रही, उसके चेहरे पर आई अचानक मुस्कान से मैं समझ गया था कि उसने युवक को पहचान लिया था ! काफी देर ...की जेहनी कशमकश के बाद जब युवक ने उसे पहचाना तो उसके पाँव के नीचे से मानो ज़मीन खिसक गई !

जब युवक विदेश गया था तो उनकी एक बड़ी आटा मिल हुआ करती थी, घर में नौकर चाकर कIम किया करते थे ! धर्म कर्म, दान पुण्य में सब से अग्रणी इस दानवीर पुरुष को युवक ताऊजी कह कर बुलाया करता था !

वही आटा मिल का मालिक और आज सब्जी का ठेला लगाने पर मजबूर .. ?

युवक से रहा नहीं गया और वो उसके पास जा पहुँचा और बहुत मुश्किल से रुंधे गले से पूछा : "ताऊ जी, ये सब कैसे हो गया ...?"

भरी ऑंखें से बूढ़े ने युवक के कंधे पर हाथ रख उत्तर दिया : - "बच्चे बड़े हो गए हैं बेटा" !!

Sunday, September 07, 2014

Population calculation ...

एक गाँव में बाढ आई थी तो मीडिया वाले ग्राम सरपंच के पास गए और बोले:- आपके गांव की आबादी सरकारी रजिस्टर में पांच सौ है और नदी से अब तक नौ सौ लोग निकाले जा चुके हैं, ऐसा कैसे?

सरपंच: रजिस्टर का हिसाब सही है! क्या है कि हमारे गांव में किसी ने हेलीकाप्टर नहीं देखा है, वो आर्मी वाले इनको निकाल के किनारे करते है और ये हेलीकाप्टर पे चढ़ने के लिए फिर से पानी में कूद जाते हैं!! भगवान झूठ न बुलाये, मैं खुद ही नौ-दस बार पानी मे कूद चूका हूँ ...

Tuesday, July 15, 2014

Sunday के दिन ...

Sunday के दिन:

1. पति अगर देर तक सोये तो बीवी:
अब उठ भी जाओ! तुम्हारे जैसा भी कोई है क्या? छुट्टी है तो इसका मतलब यह नहीं की सोते रहोगे।

2. पति अगर जल्दी उठ जाये तो बीवी:
पिछले जन्म में मुर्गे थे क्या? ठीक 4:30 बजे उठ कर कुकडू-कू करने लगते हो। इतना जल्दी उठकर क्या पहाड़ तोड़ लाओगे?

3. पति अगर सन्डे को घर पे ही रहे तो बीवी:
कुछ काम भी कर लिया करो। हफ्ते भर बाट देखते है तुम्हारे सन्डे की, उसे भी तुम केवल नहाने धोने में ही लगा देते हो।

4. पति अगर सन्डे के दिन घर से देर तक बाहर रहे (काम के सिलसिले में) तो बीवी:
कहाँ थे तुम आज पूरा दिन? आज सन्डे है कभी मुँह से भगवान का नाम भी ले लिया करो।

5. पति अगर सन्डे को पूजा करे तो बीवी:
ये टल्ली बजाते रहने से कुछ नहीं होने वाला। अगर ऐसा होता तो इस दुनिया के
रईसों में टाटा या बिल गेट्स का नाम नहीं होता बल्कि किसी पुजारी का नाम आता।

6. अगर टाटा या बिल गेट्स जैसा बनने के लिए पति दिन रात मेहनत करे तो
बीवी:
हर वक़्त काम, काम काम, तुम्हें अपने ऑफिस के ही सात फेरे ले लेने चाहिए थे। हम क्या यहाँ पर बंधुआ मजदूर है जो सारा दिन काम करें और शाम को तुम्हारा इंतज़ार करें?

7. पति अगर पत्नी को घुमाने ले जाए तो बीवी:
हमारे बीच वाले जीजा जी तो दीदी को हर महीने घुमाने ले जाते हैं और वो भी स्विट्ज़रलैंड और दार्जिलिंग जैसी जगहों पर। तुम्हारी तरह "हरिद्वार" नहाने नहीं जाते।

8. पति अगर बे खौफ हो कर नैनीताल, मसूरी, गोवा, माउन्ट आबू, ऊटी जैसी जगहों पर घुमाने ले भी जाए तो बीवी:
अपना घर ही सबसे अच्छा, बेकार ही पैसे लुटाते फिरते है। इधर उधर बंजारों की तरह घुमते फिरो। क्या रखा है घूमने में? इतने पैसा अगर घर पर रहते तो पूरे 2 साल के लिए कपडे खरीद सकते थे ।

Thursday, May 22, 2014

Jivan ki sacchai ....

प्रत्येक लाइन गहराई से पढ़े-

✅ गरीब दूर तक चलता है..... खाना खाने के लिए......।
✅ अमीर मीलों चलता है..... खाना पचाने के लिए......।
✅ किसी के पास खाने के लिए..... एक वक्त की रोटी नहीं है.....
✅ किसी के पास खाने के लिए..... वक्त नहीं है.....।
✅ कोई लाचार है.... इसलिए बीमार है....।
✅ कोई बीमार है.... इसलिए लाचार है....।
✅ कोई अपनों के लिए.... रोटी छोड़ देता है...।
✅ कोई रोटी के लिए..... अपनों को छोड़ देते है....।
✅ ये दुनिया भी कितनी निराळी है। कभी वक्त मिले तो सोचना....
✅ कभी छोटी सी चोट लगने पर रोते थे.... आज दिल टूट जाने पर भी संभल जाते है।
✅ पहले हम दोस्तों के साथ रहते थे... आज दोस्तों की यादों में रहते है...।
✅ पहले लड़ना मनाना रोज का काम था.... आज एक बार लड़ते है, तो रिश्ते खो जाते है।
✅ सच में जिन्दगी ने बहुत कुछ सीखा दिया, जाने कब हमकों इतना बड़ा बना दिया।


जिंदगी बहुत कम है, प्यार से जियो

Friday, March 07, 2014

Nice short Story

एक बार एक छोटी चिड़िया सर्दी में खाने की तलाश में उड़ कर जा रही थी ,

ठंड इतनी ज्यादा थी की उससे सहन नही हुई और खून जम जाने से वो वहीँ एक मैदान में गिर गयी....

वहां पर एक गाय ने आकर उसके ऊपर गोबर कर दिया ,

गोबर के नीचे दबने के बाद उस चिड़िया को एहसास हुआ की उसे दरअसल उस गोबर के ढेर में गर्मी मिल रही थी ,

लगातार गर्माहट के एहसास ने उस छोटी चिड़िया को सुकून से भर दिया और उसने गाना गाना शुरू कर दिया....

वहां से निकल रही एक बिल्ली ने उस गाने की आवाज़ सुनी और देखने लगी की ये आवाज़ कहाँ से आ रही है

थोड़ी देर बाद उसे एहसास हुआ की ये आवाज़ गोबर के ढेर के अंदर से आ रही है , उसने गोबर का ढेर खोदा और उस चिड़िया को बाहर निकाला और उसे खा गयी.....

♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦

आपके ऊपर गंदगी फेंकने
वाला हर इंसान आपका दुश्मन नही होता ,

और आपको उस गंदगी में से बाहर निकलने वाला हर इंसान आपका दोस्त नही होता.."

Wednesday, July 17, 2013

PYAAR ANMOL HAI

एक लड़का एक लड़की को बहुत प्यार करता था. लड़के ने लड़की को प्रपोज़ किया.. 
लड़की :- जितनी तेरी एक महीने की कमाई है, उतना मेरा रोज का खर्चा है, इसलिए मैँ तुमसे मोहब्बत
नहीं कर सकती.. 
फिर भी वो लड़का उसी लड़की को चाहता है... पंद्रह साल बाद वो दोनों किसी मॉल (दुकान) में मिलते है, बातो ही बातो में लड़की ने कहा मेरापति आज एक बहुत बड़ी कंपनी में नौकरी करता है.उसकी सेलरी एक लाख रुपये प्रति महिना है. वो बहुत होशियार है, अब तुम ही बताओ,मैंने उस दिनतुम से शादी न कर के कोई गलती तो नहीं की ना...
.
लड़के की आँख में आसू आ गये,और दोनों फिर अपने काम के लिए जाने लगे..
.
थोड़ी देर में लड़की का पति उसे लेने आया और लङकी के पति की नजर उस लड़के पर पड़ी और कहा - सर, आप यहाँ ?, 
बाद में अपनी पत्नी से मिलते हुए कहा कि :- ये मेरी कंपनी के मालिक है और एक साल का 500 करोड़
का टर्नओवर है, और सर एक लड़की को चाहते है, इसलिए आज तक सर ने शादी नही की...
लङकी Emotional हो गयी!
 यह है प्यार...!

जिन्दगी बस एक पल की मोहताज़ नहीं होती,

बस वक़्त उसे मोहताज बना देता है....


प्यार को समझे और उसे महत्व दे, उसे तोले नहीं...
क्योकि प्यार अनमोल है

Tuesday, May 15, 2012

5-minute Management Course

5-minute Management Course [Hilarious but True!]

Lesson 1:

A man is getting into the shower just as his wife is finishing up her shower, when
the doorbell rings.

The wife quickly wraps herself in a towel and runs downstairs.

When she opens the door, there stands Bob, the next-door neighbour.

Before she says a word, Bob says, ‘I’ll give you $800 to drop that towel.’

After thinking that she has a chance earning $800 within a minute, the woman drops
her towel and stands naked in front of Bob, aftera few seconds, Bob hands her $800
and leaves.

The woman wraps back up in the towel andgoes back upstairs.

When she gets to the bathroom, her husband asks, ‘Who was that?’

‘It was Bob the next door neighbour,’ she replies.

‘Great,’ the husband says, ‘Did he say anything about the $800 he owes me?’

Moral of the story:
Do not share any critical information unless you understand the need of opposite
person. It may or may not help him but surely won’t help you.



Lesson 2:

A priest offered a Nun a lift.

She got in and crossed her legs, forcing her gown to reveal a leg. The priest
nearly had an accident.

After controlling the car, he stealthily slid his hand up her leg.

The nun said, ‘Father, remember Psalm 129?’

The priest removed his hand. But, changing gears, he let his hand slide up her leg
again.

The nun once again said, ‘Father, rememberPsalm 129?’

The priest apologized ‘Sorry sister, but the flesh is weak.’

Arriving at the convent, the nun sighed heavily and went on her way.

On his arrival at the church, the priest rushed to look up Psalm 129. It said, ‘Go
forth and seek, further up, you will find glory.’

Moral of the story:
If you are not well informed in your job, you might miss a great opportunity.



Lesson 3:

A sales rep, an administration clerk, and the manager are walking to lunch when
they find an antique oil lamp.

They rub it and a Genie comes out.

The Genie says, ‘I’ll give each of you just one wish.’

‘Me first! Me first!’ says the admin clerk. ‘I wantto be in the Bahamas, driving a
speedboat, without a care in the world.’

Puff! She’s gone.

‘Me next! Me next!’ says the sales rep. ‘I want to be in Hawaii , relaxing on the
beach with my personal masseuse, an endless supply of Pina Coladas and the love of
my life.’

Puff! He’s gone.

‘OK, you’re up,’ the Genie says to the manager.

The manager smiles and say, ‘I want those two back in the office after the lunch-
time.’

Moral of the story:
Always let your boss have the first say.


Lesson 4:

An eagle was sitting on a tree resting, doing nothing.

A small rabbit saw the eagle and asked him,‘Can I also sit like you and do
nothing?’

The eagle answered: ‘Sure, why not.’

So, the rabbit sat on the ground below the eagle and rested. All of a sudden, a
fox appeared, jumped on the rabbit and ate it.

Moral of the story:
To be sitting and doing nothing, you must be sitting very, very high up.

Lesson 5:

A Turkey was chatting with a Bull.

‘I would love to be able to get to the top of that tree’ sighed the Turkey, ‘but I
haven’t got the energy.’ ‘Well, why don’t you nibble on some of my droppings?’
replied the Bull. They’re packed with nutrients.’

The Turkey pecked at a lump of dung, and found it actually gave her enough
strength to reach the lowest branch of the tree.

The next day, after eating some more dung, she reached the second branch.

Finally after a fourth night, the Turkey was proudly perched at the top of the
tree..

She was promptly spotted by a farmer, who shot her out of the tree.

Moral of the story:
Bull Shit might get you to the top, but it won’t help you stay there for long.

Lesson 6:

A little bird was flying south for the winter. It was so cold the bird froze and
she fell to the ground into a large field.

While she was lying there, a cow came by and dropped some dung on her.

As the frozen bird laid there in the pile of cow dung, she began to realize how
warm it was.

The dung was actually thawing her out!

She lays there all warm and happy, and soon began to sing for joy.

A passing cat hears the bird singing and comes to investigate.

Following the sound, the cat discovered the bird under the pile of cow dung, and
promptly dug her out and ate her.

Morals of the story:
[1] Not everyone who shits on you is your enemy.
[2] Not everyone who gets you out of shit is your friend.
[3] And when you’re in deep shit, keep your mouth shut! 

Friday, March 30, 2012

Hair Dryer (joke)

A distinguished young woman on a flight from Ireland asked the priest sitting beside her, "Father, may I ask a favor?"

"Of course, child. What may I do for you?"

"Well, I bought an expensive electronic hair dryer for my mother's birthday that is unopened and well over the Customs limits. I'm afraid they'll confiscate it. Is there any way you could carry it through Customs for me...under your robe, perhaps?"

"I would love to help you, dear, but I must warn you... I will not lie."

"With your honest face, Father, no one will question you."

When they got to Customs, the woman let the priest go ahead of her. The official asked, "Father, do you have anything to declare?"

"From the top of my head down to my waist, I have nothing to declare."

The official thought this answer strange, so asked, "And what do you have to declare from your waist to the floor?"

"I have a marvelous instrument designed to be used on a woman, but which is, to date...unused."

Roaring with laughter, the official said, "Go ahead, Father. Next!"

Tuesday, March 20, 2012

A couple of secs.. (joke)

A little girl runs out to the backyard where her father is working, and asks him, "Daddy, what's Sex?"

"OK," he thinks, "this day was bound to come, and I'm not going to let my little princess learn about sex from the streets."

So, he sits her down, and tells her all about the birds and the bees. He tells her about conception, intercourse, puberty and menstruation.

Then she asks, "Daddy, what is 'A Couple'?"

And he carries on, "A couple is two people like your mom and me." And he goes on to describe gay, lesbianism, etc...

The father finally asks, "So why did you want to know about 'a couple' and 'Sex'?"

"Oh, mummy said lunch would be ready in a couple of secs..." the girl replies.

Moral: If you don't understand the question properly, even the well-described answers are useless.

Friday, November 25, 2011

Short Story with a Good message

Short Story with a Good message - Read This good one



Little girl and her father were crossing a bridge. The father was kind of scared so he asked his little daughter, "Sweetheart, please hold my hand so that you don't fall into the river." The little girl said, "No, Dad. You hold my hand." "What's the difference?" Asked the puzzled father. "There's a big difference," replied the little girl. "If I hold your hand and something happens to me, chances are that I may let your hand go. But if you hold my hand, I know for sure that no matter what happens, you will never let my hand go."

In any relationship, the essence of trust is not in its bind, but in its bond. 

So hold the hand of the person who loves you rather than expecting them to hold yours...This message is too short......but carries a lot of Feelings .